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नागरिक सुविधाओं का नामकरण पीएम एवं सीएम जैसे शीर्षको पर करना उचित नहीं।

भारत में आमतौर पर लोक कल्याणकारी योजनाओं के नाम प्रधानमंत्री(पीएम) तथा मुख्यमंत्री(सीएम) जैसे शीर्षकों से शुरू होते हैः प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, मुख्यमंत्री मेधावी छात्रवृत्ति योजना इत्यादि। केन्द्र और राज्यों द्वारा प्रायोजित योजनाओ के नाम इसी तर्ज पर रखने की परंपरा बन गई है। हालांकि इस पर कभी आपत्ति नहीं की गई है। शायद इसका कारण यह हो सकता है कि इससे स्पष्ट पता लग पाता है कि कौन सी योजना केन्द्र या राज्य की है। इसके अतिरिक्त यह भी एक सच्चाई है कि देश की आबादी का बड़ा हिस्सा शैक्षिक रूप से इतना सक्षम नहीं है कि वह अंतर कर सके की कौन सी योजना केन्द्र अथवा राज्य की है। इस दृष्टिकोण से नामकरण की इस परंपरा को सही ठहराया जा सकता है।

लेकिन हाल के वर्षों में नामकरण की इस परंपरा का जिस तरह नागरिक सुविधाओं के नामकरण में प्रयोग किया जा रहा है, वह उचित प्रतीत नहीं होता है। नागरिक सुविधाओं- स्कूलों, कॉलेज, परिवहन सुविधाएँ इत्यादि के नामकरण में पीएम तथा सीएम जैसे शीर्षको का इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेष रूप से सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूलों बनाने के नाम पर उनके नाम पीएम तथा सीएम जैसे शीर्षकों पर रखे जा रहे हैः पीएम श्री स्कूल, सीएम श्री स्कूल(दिल्ली), पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस(मध्यप्रदेश) इत्यादि। अभी तक शैक्षणिक संस्थानों के नाम महापुरुषों या औपचारिक नामों पर रखने की परंपरा रही है। लेकिन नामकरण की जो नई परंपरा शुरू हुई है उससे शैक्षणिक संस्थानों की गरिमा कम होती है।

नागरिक सुविधा में प्रधानमंत्री के शीर्षक का उपयोग को दिखाता एक चित्र।

इसके अतिरिक्त हाल ही में शहरी क्षेत्रों मे ‘पीएम ई-बस सेवा’ नाम से इलेक्ट्रिक बसे चलाने की शुरूआत हुई है। वही टेक्सटाइल उद्योग के विकास के लिए देश के चुंनिंदा स्थानों में पीएम- मित्र (PM-MITRA) अर्थात् (प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल) नाम से विशेष टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जा रहे है। पिछले कुछ सालों में अनेक योजनाओं, अभियानों एवं कार्यक्रमों के नाम बदलकर प्रधानमंत्री के शीर्षक पर रखे गये हैः पीएम पोषण योजना(पूर्व नाम- मिड डे मील योजना), पीएम उच्चतर शिक्षा अभियान(पूर्व नाम- राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) इत्यादि। इन योजनाओं, कार्यक्रमों तथा विकास परियोजनाओं इत्यादि के उद्देश्यों पर निसंदेह कोई सवाल नही उठाया जा सकता है। सवाल सिर्फ यह है कि क्या उपरोक्त नागरिक सुविधाओं,योजनाओं तथा बुनियादी ढाँचे के नाम के आगे पीएम या सीएम जैसे शीर्षक लगाना क्या उचित परंपरा मानी जा सकती है?

नागरिक सुविधाओं, सेवाएँ, विकास योजनाओं तथा बुनियादी ढाँचा(Infrastructure) इत्यादि का नामकरण पीएम तथा सीएम जैसे शीर्षकों पर करना किसी सत्ताधारी व्यक्ति के प्रभुत्व को दर्शाने का प्रयास मालूम पड़ता है। नामकरण की इस परंपरा का विरोध आवश्यक है,अन्यथा आने वाले समय में यह परंपरा इतनी अधिक सामान्य हो जाएगी कि अस्पतालों, सड़कों, ट्रेन, एयरपोर्ट सहित अन्य नागरिक सुविधाओं के नाम भी इसी तर्ज पर रखे जाने लगेंगे। अतः इस प्रकार की परंपरा किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए शोभा नहीं देती है।

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