google-site-verification: google487521925613d3a2.html

भ्रष्टाचार लोगों को बुनियादी चीजों के लिए भी तरसा देगा।

भ्रष्टाचार, भारत के सरकारी सिस्टम की नस-नस में समा चुका है। भष्टाचार से आशय अनैतिक रूप से धन अर्जित करने से है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी भ्रष्टाचार बोध सूचकांक 2024 के अनुसार भारत का 180 देशों में 96वाँ स्थान है। उल्लेखनीय है कि इस सूचकांक के अनुसार पहले स्थान पर रहने वाले देश में सबसे कम भ्रष्टाचार होता है व सबसे आखिरी स्थान प्राप्त करने वाले देश मे सबसे अधिक भ्रष्टाचार होता है।

भारत के सरकारी तंत्र में छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक अर्थात एक छोटे सरकारी दफ्तर से लेकर देश के सर्वाेच्च संस्थानों तक भ्रष्टाचार अपनी पहुँच स्थापित कर चुका है। आइए भ्रष्टाचार पर गंभीरता एवं विस्तार से चर्चा करें।

भ्रष्टाचार की प्रतीकात्मक झलक
भ्रष्टाचार की प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत में भ्रष्टाचार का विस्तार कहा तक है?

भारत में सरकारी तंत्र का प्रत्येक स्तर भ्रष्टाचार की गिरफ्त में है जहाँ यह अलग-अलग रूप में दिखाई पड़ता है। आइए यहाँ कुछ चुंनिदा क्षेत्रों की चर्चा करे-ः

1. पुलिस तथा न्यायपालिका

टांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस भारत की सबसे भ्रष्टतम संस्था है। यह लोगों की आम धारणा भी है। देश के पुलिस तंत्र में अवैध वसूली, रिश्वत, पेसै के बदले सबूतों से छेड़छाड़ जैसे मामले बहुत सामान्य है।

न्यायपालिका मे भ्रष्टाचार दस्तक दे चुका है। अभी तक लोग इसे भ्रष्टाचार से अछूता मानते थे। न्यायधीशों पर भष्टाचार के आरोप लगने के मामले सामने आ रहे हैं। यह गँभीर चिंता का विषय है क्योंकि यह हमारे समाज तथा देश में न्याय के सिध्दांत की नींव को कमजोर कर देगा।

2. क्रियान्वयन के स्तर पर भ्रष्टाचार

नागरिक सेवाओं को प्रदान करने एवं लोक कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य शासन के निचले स्तर पर किया जाता है। आज इसी स्तर पर सबसे अधिक भ्रष्टाचार किया जाता है। आज शायद ही कोई ऐसा सरकारी दफ्तर हो जहाँ बिना रिश्वत के काम हो पाता हो। लोक कल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार एवं फर्जीवाड़े का घुन लग रहा है जिसके कारण योजनाएँ अपने मूल उद्देश्य को पूरा कर पाने में फेल साबित हो रहीं है। उदाहरण के लिए, प्रधानमंत्री आयुषमान योजना की बात की जाए तो निसंदेह यह करोड़ो लोगों के लिए लाभकारी रही है किन्तु कैग(CAG) की रिपोर्ट की मुताबिक इस योजना में भारी आर्थिक गड़बड़ियां पाई गईं हैं।

3. सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार

यह दुर्भाग्य है कि भारत में कोई भी सरकारी खरीद या टेंडर बिना घोटाले या वित्तीय अनियमितता के नही हो सकती है। सरकारी खरीद में फर्जा बिल लगाना, साँठगाँठ करके मँहगी दरो पर गुणवत्ताहीन वस्तुएँ खरीदना, कमीशनखोरी, टेंडर को अपने लाभ के लिए प्रभावित करना इत्यादि मामले जमीनी स्तर पर बहुत सामान्य हो चुके है।

4. पदस्थापना(पोस्टिंग) एवं ट्रांसफर में भ्रष्टाचार

सरकारों पर सरकारी तंत्र के महत्वपूर्ण पदों पर पोस्टिंग एवं ट्रांसफर के लिए एक तरह से तबादला उद्योग चलाने का आरोप लगता है, जिसमें महत्वपूर्ण पदों को लाखों-करोड़ो रुपयों में बेचा जाता है। यह स्वाभाविक है कि जो व्यक्ति भ्रष्टाचार की बदौलत किसी पद पर आसीन हुआ हो. वह जमकर भ्रष्टाचार ही करेगा।

5. पदानुक्रम या पदसोपान(Hierachy) के आधार पर भ्रष्टाचार

भ्रष्ट सरकारी तंत्र ने भ्रष्टाचार का छुपे रूप में एक व्यवस्थित ढाँचागत रूप विकसित कर लिया है जिसमें भ्रष्टाचार पदानुक्रम(hiercahy) के आधार पर किया जाता है। दूसरे शब्दों में एक भ्रष्ट अधिकारी भ्रष्टचार से प्राप्त धन का कुछ हिस्सा बचाकर शेष हिस्से को अपने उच्च अधिकारियोंं को पहुँचा देता है। इसके बदले में उसे भ्रष्टाचार करने की खुली छूट एवं संरक्षण मिलता है।

भ्रष्टाचार किस तरह लोगों को प्रभावित कर रहा है?

भ्रष्टाचार के कारण सरकारी तंत्र तथा समाज में बहुआयामी प्रभाव पडे़ है। एक ओर जहाँ नागरिक सेवाएँ गुणवत्ताहीन हुई हैं वहीं दुसरी ओर समाज का बुरी तरह से नैतिक पतन हुआ है। भ्रष्टाचार के कारण सरकारी तंत्र इतना खोखला हो चुका है कि इसके सहारे किसी भी नियम-कायदों, प्रकियाओं, कानूनों आदि को ताक में रखना या उन्हें बेअसर करना बहुत आसान हो चुका है। उदाहरण के लिए, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त के लिए आवश्यक मानक पूरे करने बजाय यह काम कुछ रुपयों की रिश्वत में किया जा सकता है। इसी तरह किसी बिल्डर द्वारा भ्रष्ट नेताओं एवं अधिकारियों से मिलीभगत करके अवैध प्रोजेक्ट या कॉलोनी स्थापित बहुत आसान है। इस तरह भ्रष्टाचार ने सरकारों एवं सरकारी तंत्र की साख एवं विश्वसनीयता को कमजोर कर दिया है।

भ्रष्टाचार, लोगों को बुनियादी नागरिक सुविधाओं के लिए भी तरसा रहा है। आज सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों को मिलने वाले राशन से लेकर सड़कों के निर्माण तक तथा किसी व्यक्ति के जन्म प्रमाण पत्र से लेकर मृत्यु प्रमाण पत्र तक के बीच की हर प्रकिया भ्रष्टाचार से होकर गुजरती है।

भ्रष्टाचार ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को भी भ्रष्ट कर चुका है जो कि देश एवं समाज को अतिआवश्यक बुनियादी सेवा प्रदान करता है। टांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक देश का स्वास्थ्य क्षेत्र पुलिस के बाद दूसरी सबसे भ्रष्ट संस्था है। कई बार सरकारी अस्पतालों मे मरीजों से रिश्वत माँगने की खबरें आतीं है, वहीं निजी अस्पताल तो मरीजों को लूटने के लिए कुख्यात ही हैं।

भ्रष्टाचार समाज को नैतिक पतन की ओर ढकेल चुका है, जिसका परिणाम हम अलग-अलग रूपों में देखते हैं। कहीं अधिक लाभ के लालच में नकली एवं मिलावटी खाद्य सामग्रियां बेची जा रही हैं तो कहीं लोग मजबूरी को लाभ का अवसर मानकर लोगों को लूटने में व्यस्त दिखाई पड़ते है। आज भारतीय समाज के हर पेशे में व्यावसायिक नैतिकता(Professional ethics) खत्म होती जा रही हैं, चाहे वह चिकित्सा क्षेत्र या कानूनी पेशा। इन सभी परिस्थितियों के मूल में भ्रष्टाचार ही है।

भ्रष्टाचार ने पर्यावरण को भी पर्याप्त नुकसान पहुँचाया है। नदियों में अवैध रेत खनन, जंगलों में अवैध कटाई, खनन माफिया आदि के फलने- फूलने मे भ्रष्ट सिस्टम, भ्रष्ट राजनेताओं एवं अधिकारियों का बड़ा योगदान होता है।इस प्रकार के अवैध कार्यों में भ्रष्टाचार आवश्यक रूप से शामिल होता है।

सरकारों का भ्रष्टाचार के प्रति रुख

सरकारों का भ्रष्टाचार के प्रति अब तक नरम रुख ही रहा है। आजादी के बाद से अभी तक भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारों द्वारा कोई भी ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं। इसके बजाय सरकारों ने ही भ्रष्टाचार एवं भ्रष्टाचारियों के प्रति संरक्षणवाद की नीति अपना ली है। सरकारों द्वारा भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अभियोजन(मुकदमा) की कई सालों तक अनुमति नहीं दी जाती है। आज भी ऐसे हजारों की संख्या में भ्रष्ट सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी हैं जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले चल रहें है किन्तु आज भी वे सरकारी सेवाओं में काम कर रहें हैं। सरकारों द्वारा इनके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई तक नहीं की जाती है। ऐसी कार्रवाई सिर्फ अपवादस्वरूप ही की जाती है।यह सभी तथ्य स्पष्ट रूप से सरकारों की भ्रष्टाचार में संलिप्तता एवं उसे पोषित करने की पुष्टी करते हैं

निष्कर्ष

भ्रष्टाचार भारत के सरकारी तंत्र तथा समाज में हावी हो चुका है। यह समाज को नैतिक पतन की ओर ले जाने में सफल हो चुका है। आज भ्रष्टाचार के पक्ष में ऐसा माहौल बन चुका है कि लोग अनैतिक तरीकों से धन अर्जित की खोज में ही रहतें हैं। इसकी जड़े इतनी गहरी हो चुकी हैं कि इसे उखाड़ने के लिए बहुत बड़ी राजनीतिक तथा सामाजिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। अगर समय रहते इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय मे देश के नागरिकों के सामने भयावह परिस्थिति होगी जहाँ आम जनजीवन नारकीय हो सकता है। इसका सबसे बुरा खामियाजा आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भुगतना पडे़गा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top