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सरकारी कर्मचारियों का केवल वेतन बढ़ रहा है,उनकी कार्यगुणवत्ता नहीं।

हाल ही में केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी है। इसके लागू होने से केन्द्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन में जबरदस्त बढ़ोतरी की संभावना है। उल्लेखनीय है कि वेतन आयोग प्रत्येक 10 वर्षों में गठित किया जाता है,जो सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों तथा पेंशन आदि पर अपनी सिफारिशें देता है।

सरकारें, सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से अपनी नीतियों, आदेशों, योजनाओं एवं कार्यक्रमों को क्रियान्वित करतीं हैं। इसके बदले सरकारों द्वारा कर्मचारियों(विशेष रुप से नियमित) को बेहतरीन वेतन, भत्ते और पेंशन सहित अन्य सेवानिवृति लाभ दिए जाते है। सरकारी कर्मचारियों में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी से लेकर शीर्ष अफसर शामिल होते है।

एक सरकारी कर्मचारी को किसी कार्य के लिए प्राइवेट सेक्टर में उसी कार्य को कर रहे कर्मचारी से तीन गुना से अधिक वेतन मिलता है, किन्तु फिर भी उसके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं मे लापरवाही, भ्रष्टाचार, खानापूर्ति एवं गैर-जिम्मेदारी दिखाई पड़ती है। इस लेख में इसी अनछुये पहलु पर चर्चा की गई है।

सरकारी कर्मचारियों की प्रतीकात्मक तस्वीर

सरकारी कर्मचारियों की मौजूदा कार्यप्रणाली पर एक नजर

सरकार के अलग-अलग विभागों एवं संस्थाओं की भिन्न-भिन्न कार्यप्रणाली है। देश की अधिकतर जनता इनमें कार्यरत सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। आइए भारत के सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर नजर डालें।

किसी भी देश की उन्नति एवं विकास का अनुमान उसके सरकारी स्कूलों से लगाया जा सकता है। भारत के सरकारी स्कूलों में न तो पर्याप्त संसाधन है और न ही पर्याप्त शिक्षक है। जितने शिक्षक नियोजित हैं भी तो उनमें से अधिकतर शैक्षणिक कार्यों के प्रति उदासीन पाए जाते हैं। दूर-दराज के इलाकों के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के गायब रहने की खबरें अखबारों में आती रहती हैं। इनके द्वारा पढ़ाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। स्थिति इतनी खराब है कि स्कूलों में कई शिक्षक कक्षा में आते तक नहीं है। यह कोई मनगढ़ंत बातें नहीं हैं बल्कि सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे या पासआउट हो चुके विद्याथियों के सामान्य अनुभव रहे हैं।

सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ पर मरीजों के इलाज में उदासीनता, लापरवाही. तथा मरीजों एवं उनके परिजनों से बुरा व्यवहार करने की शिकायतें मिलती रहती है। अधिकतर सरकारी डॉक्टर अस्पतालों में खानापूर्ति करके निजी प्रेक्टिस में व्यस्त रहते हैं। अब तो सरकारी अस्पतालों में रिश्वत लेने के भी मामलें सामने आने लगे है।

पुलिस भारत में सबसे चुस्त-दुरुस्त संस्था मानी जाती है, जो वाकई सच है। किन्तु भ्रष्टाचार ने इसकी कार्यक्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है। अंतरर्राष्ट्रीय संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस भारत की सबसे भ्रष्ट संस्था है।

वर्तमान में सरकार के प्रत्येक विभागों एवं संस्थानों में भ्रष्टाचार व्याप्त है बल्कि लगातार बढ़ता भी जा रहा है, जहाँ बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता है। इस भ्रष्ट व्यवस्था में राजनेताओं के बाद सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी ही दूसरे सबसे बडे़ लाभार्थी या हितधारक हैं। सरकारी सिस्टम ने भ्रष्टाचार के अनगिनत स्त्रोत निर्मित कर लिया है।

मेरा दृष्टिकोण

मेरा इस संदर्भ में स्पष्ट दृष्टिकोण है कि जब सरकारी कर्मचारियों की कार्यगुणवत्ता एवं प्रदर्शन जस का तस है तो आम जनता के टैक्स के पैसों को इनकी अनुचित रुप से वेतन बढ़ोतरी में बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। हम देखते है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक बेहतर प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं कहीं सरकारी डॉक्टर अपने कामों में उदासीनता बरत रहे हैं। एक सरकारी इंजीनियर किसी निर्माण का सही ढंग से पर्यवेक्षण नहीं कर पा रहा है। सरकारी कर्मचारी तमाम सुविधाओं के बाद भी हर मामलों में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों से कमतर दिखाई पड़ते हैं। सरकारें, सरकारी कर्मचारियों द्वारा किए जा सकने वाले कई कामों को आउटसोर्सिग एजेंसियो द्वारा करा रहीं हैं। इस सब बावजूद भी यदि सरकारें सार्वजनिक धन को अनुचित वेतन बढ़ोतरी में लुटा रही है जबकि सरकारों का राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है, तो यह बिल्कुल भी औचित्यपूर्ण नहीं है। सरकारों की इसी प्रवृत्ति ने सरकारी कर्मचारियों को अपने कर्तव्यों के प्रति मानसिकता को विकृत कर दिया है जिसके कारण आम जनता के हित एवं देश का विकास प्रभावित हो रहा है।

भारत की आबादी के मुकाबले सरकारी कर्मचारियों की भारी कमी है। वर्तमान में सरकारे नियमित सरकारी कर्मचारियों को जरुरत से अधिक वेतन दे रही हैं।इसके बजाए सरकारें न्यायसंगत वेतन देकर अधिक से अधिक लोगों को सरकारी सेवाओं में रोजगार प्रदान करे ताकि सरकारी कर्मचारियों की कमी को पूरा किया जा सके। इसके अतिरिक्त कर्मचारियों को उनकी दक्षता एवं कार्य प्रदर्शन(Work Performance) के आधार पर वेतनवृद्धि तथा पदोन्नति(promotion) दी जानी चाहिए न कि केवल वरिष्ठता के आधार पर। वर्तमान में नियमित सरकारी कर्मचारियों को जरुरत से अधिक रोजगार की सुरक्षा प्राप्त है। इसे न्यायसंगत बनाने की जरुरत है ताकि सरकारी कर्मचारियों में बेहतर अनुशासन स्थापित किया जा सके।

यह संभव है कि इस प्रकिया से मौजूदा सरकारी कर्मचारियों के हित प्रभावित होते हों किन्तु देशहित तथा जनहित से सर्वोपरि कुछ नहीं है। अतः सरकारों को सरकारी कर्मचारियों के प्रति नीतियों, सेवा शर्तों, वेतन वृद्धि के आधार, पदोन्नति, सरकारी नौकरी में मिल रही अतिरेक रोजगार सुरक्षा (over job security) इत्यादि पर गंभीरता से समीक्षा करने की आवश्यकता है।

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