भारत इतिहास में विश्वगुरू था, इस पर कोई संदेह नहीं हो सकता है। ऐतिहासिक साक्ष्य, योग-ध्यान, आयुर्वेद, वेद, उपनिषद, जैसी प्रभावशाली सांस्कृतिक पूँजी तथा इतिहास में नालंदा, विक्रमशिला, तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों का ज्ञान के वैश्विक केन्द्र के रूप में विकसित होना, भारत के विश्वगुरू होने के दावे को प्रमाणित करता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन इतिहास की उपलब्धियाें एवं गौरव के आधार पर भारत को वर्तमान युग का विश्वगुरू कहा जा सकता है। अक्सर सरकारों, राजनेताओं, बुद्धीजीवियों सहित सार्वजनिक मंचों में देश के विश्वगुरू होने के बड़े-बड़े दावे किये जाते है।
विश्वगुरू का अर्थ है विश्व को सीख देने वाला। अगर हम सचमुच विश्वगुरू है तो इस नाते हमने विश्व को क्या दिया है। क्या भारत रिसर्च, विज्ञान एवं तकनीक, शिक्षा, खेल, कला, मानव विकास, आर्थिक तथा सैन्य आदि क्षेत्रों मे अपने आप को एक आदर्श देश के रूप में स्थापित कर पाया है, जिसकी बदौलत हम स्वयं को दुनिया के समक्ष विश्वगुरू के तौर पर पेश कर सके। शायद इनमें से किसी में नहीं। आइए तथाकथित विश्वगुरू होने के भ्रम से दूर हटकर देश की कुछ वास्तविकताओं पर नजर डालें-
देश की शिक्षा व्यवस्था की हालत विकसित देशों के मुकाबले कमतर है। दुनिया के विकसित माने जाने वाले देशों मे शिक्षा व्यवस्था कौशल-केंद्रित तथा सिखाने की प्रक्रिया पर आधारित है। वहीं भारत की शिक्षा प्रणाली पूरी तरह मार्क्स – केंद्रित बनकर रह गई है। आजादी के इतने सालों बाद भी देश में ऐसा कोई भी विश्वविद्यालय नही है जिसकी कोई वैश्विक साख हो। न ही भारतीय विश्वविद्यालयों के द्वारा किए गए शोधो(रिसर्च) की कोई विशेष वैश्विक साख है। देश मे सरकारी शिक्षा व्यवस्था की खस्ताहालत है जिसके कारण देश के अधिकांश नागरिक स्कूली शिक्षा के लिए निजी स्कूलों पर निर्भर हो चुके है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण भारत में अशिक्षा आज भी बड़ी समस्या बनी हुई है।
इस पर कोई संदेह नहीं है कि आजादी से लेकर अब तक देश ने काफी प्रगति की है किन्तु मानव विकास के मामले में अभी भी बहुत पीछे है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा जारी मानव विकास रिपोर्ट 2025 के अनुसार भारत मानव विकास के मामले में 193 देश में 130 वाँ स्थान पर है। इस तरह भारत मध्यम मानव विकास वाले देशों की श्रेणी में आता है। उल्लेखनीय है कि मानव विकास सूचकांक(रिपोर्ट) में शिक्षा,स्वास्थ्य,और जीवन स्तर(आय) जैसे बुनियादी तत्वों को मापदंड के तौर पर प्रयोग किया जाता है।
नवाचार(Innovation) और तकनीक(Technology) के क्षेत्र मे हम अन्य विकसित देशों से पीछे दिखाई पड़ते है। हांलाकि भारत सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन भारत की आज सोशल मीडिया एप्लीकेशन सहित अन्य प्रौद्योगिकी के लिए अमेरिका समेत अन्य तकनीकी रूप से समृद्ध देशों पर निर्भरता है। देश में अभी तक गूगल, माइक्रोसाफ्ट,मेटा,इंस्टाग्राम,वाट्सएप,जीमेल जैसे एप्लीकेशन के स्वदेशी विकल्प विकसित नहीं हो सके है जो इन्हें प्रतिस्पर्धा दे सके। आधुनिक तकनीक का हालिया उदाहरण आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस(एआई) है जिसमें चेट जीपीटी, ग्रोक, डीपसेक जैसे शानदार एआई नवाचार (इनोवेशन) सामने आए है लेकिन भारत मे एआई क्षेत्र मे कोई खास नवाचार (इनोवेशन) फिलहाल नहीं हो सके है।
भारत में नागरिक सुविधाओं (Public amenities) की हालत अच्छी नहीं है। नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सरकारों की होती है। यह कड़वा सच है कि भारत में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़के, सार्वजनिक परिवहन समेत अन्य नागरिक सुविधाएँ निम्न स्तर की है। इसके कारण लोग गुणवत्तायुक्त नागरिक सुविधाओं को पाने के लिए जूझते रहते है। यही प्रमुख वजह देश की अधिकांश जनता बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्राइवेट सेक्टर पर निर्भर हो चुकी है।
निष्कर्ष
उपरोक्त चर्चा के उपरांत निष्कर्षतः कहा जा सकता है भारत के विश्वगुरू होने का दावा और भारत की जमीनी हकीकत आपस मे मेल नहीं खाती है। देश मे वे परिस्थितियाँ ही मौजूद नहीं है जिसके बदौलत कोई देश विश्वगुरू कहलाता है। अगर इसे अमेरिका के उदाहरण से समझे तो, अमेरिका स्वयं को सुपरपावर मानता है, सारा विश्व भी उसे सुपरपावर के रूप मे मान्यता देता है तथा उसने हर क्षेत्र में जैसे अंतरिक्ष,ज्ञान,आर्थिक,सैन्य,तकनीक एवं इनोवेशन,कला सहित अन्य क्षेत्रों में खुद को सुपरपावर के तौर पर साबित किया है।
अब भारत के विश्वगुरु होने के संदर्भ मे देखे तो स्थिति बहुत विरोधाभासी नजर आती है। न हमारे नागरिक अपने आस-पास देश को विश्वगुरू के रूप मे महसूस कर पाते है, न ही दुनिया हमे विश्वगुरु की मान्यता देती है, न ही हमने किसी ऐसे क्षेत्र मे उत्कृष्टता हासिल की है जिसके बदौलत विश्वगुरू होने का दावा कर सके। अतः हमे विश्वगुरू होने के भ्रम और खोखले दावों से बचना चाहिए ताकि देश की जमीनी हकीकत में बदलाव लाकर वास्तव में भारत विश्वगुरू के रूप मे प्रतिष्ठित हो सके।
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